Thursday, May 12, 2011

मैं जो दीप जलाये चलता हूँ

मैं जो दीप जलाये चलता हूँ ,
आंधियों ! बुझा न देना उसको

मैं जो राह बनाये चलता हूँ,
तूफानों ! मिटा न देना उसको
मैं कितना लड़ा हूँ जिंदगी से,
वहारों ! बता न देना उसको
मैं मजबूरियों से दूर हूँ,
यादों ! सता न देना उसको,
मैं जो दीप जलाये चलता हूँ ,

आंधियों ! बुझा न देना उसको
मैं दुखों में उनके लिए हँसता हूँ,
आंसुओं ! रुला न देना उसको
मैं हार रोज आहें भरता हूँ,
ख्वाबों ! जता न देना उसको
मैं वेचैनी में जब देखना चाहूँ
घटाओं ! छुपा न देना उसको
मैं जो दीप जलाये चलता हूँ ,

आंधियों ! बुझा न देना उसको